चमोली: वर्षों के इंतजार के बाद ग्रामीणों ने खुद उठाया फावड़ा, सकंड गांव में शुरू किया सड़क निर्माण
चमोली। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी कई गांव सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। चमोली जिले के सकंड गांव में वर्षों से सड़क की मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों ने अब सरकारी इंतजार छोड़कर स्वयं सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। इस अभियान में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के नेता आशीष नेगी भी ग्रामीणों के साथ श्रमदान करते हुए नजर आए।
ग्रामीणों ने फावड़ा, कुदाल और अन्य उपकरणों के साथ श्रमदान कर सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत की। लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग शासन-प्रशासन के समक्ष रखी जा रही थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद पहल करने का निर्णय लिया।
आशीष नेगी बोले- अपने विकास के लिए खुद आगे आना होगा
सड़क निर्माण कार्य में शामिल हुए उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशीष नेगी ने कहा कि सकंड गांव की यह पहल पूरे उत्तराखंड के सड़कविहीन गांवों के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने कहा, “यदि आप अपने लिए प्रयास नहीं करेंगे तो कोई और आपके लिए प्रयास नहीं करेगा। सकंड गांव की तर्ज पर हर सड़कविहीन गांव के ग्रामीणों को अपने गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए स्वयं भी प्रयास करना चाहिए।”
आशीष नेगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है और जब जनता स्वयं आगे आती है तो परिवर्तन की राह आसान हो जाती है।
वर्षों से सड़क की मांग कर रहे थे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों और शासन-प्रशासन के समक्ष सड़क निर्माण की मांग उठाई, लेकिन वर्षों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार इंतजार के बावजूद सड़क न बनने से परेशान ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान का रास्ता चुना।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क बनने से गांव के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार से जुड़ी समस्याओं में भी काफी हद तक राहत मिलेगी।
अन्य गांवों के लिए भी बनी मिसाल
सकंड गांव के ग्रामीणों द्वारा शुरू किया गया यह प्रयास उन तमाम गांवों के लिए प्रेरणा बन रहा है, जहां आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीणों का मानना है कि सड़क केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि विकास की पहली सीढ़ी है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि सड़क सुविधा मिलने से विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों और आम ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में भी राहत और बचाव कार्य तेजी से किए जा सकेंगे।
विकास योजनाओं पर उठे सवाल
ग्रामीणों के इस प्रयास ने एक बार फिर सरकारी विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ग्रामीण खुद सड़क निर्माण के लिए मजबूर हैं, तो यह संबंधित विभागों और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंतन का विषय है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार और संबंधित विभाग जल्द से जल्द क्षेत्र की सड़क समस्याओं का स्थायी समाधान करें ताकि गांवों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जा सके।
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Q1. सकंड गांव कहाँ स्थित है?
Q2. सड़क निर्माण कार्य में किसने श्रमदान किया?
Q3. ग्रामीणों ने खुद सड़क निर्माण क्यों शुरू किया?
Q4. सड़क बनने से ग्रामीणों को क्या लाभ होगा?
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