आईटीआई प्रशिक्षण को उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार करें, युवाओं को मिलें अधिक अप्रेंटिसशिप अवसर
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने PM-SETU और PM-NAPS योजनाओं की समीक्षा की, स्थानीय उद्योगों की मैपिंग के दिए निर्देश
उत्तराखंड। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने प्रगति पोर्टल के माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में संचालित पीएम-सेतु (PM-SETU) और पीएम-एनएपीएस (PM-NAPS) योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने युवाओं के प्रशिक्षण, एनरोलमेंट, अप्रेंटिसशिप, उद्योगों के साथ समन्वय और प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने की स्थिति की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आईटीआई में दिया जाने वाला प्रशिक्षण केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि उसे वर्तमान उद्योगों और बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे ट्रेड और कौशल में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए, जिनकी वास्तविक रोजगार बाजार में मांग है।
उद्योगों की जरूरत के हिसाब से बढ़ाया जाए युवाओं का प्रशिक्षण
जिलाधिकारी ने बाजार की मांग और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आईटीआई में युवाओं का एनरोलमेंट बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर तभी मिलेंगे, जब उनके कौशल और उद्योगों की जरूरत के बीच सही तालमेल हो। इसके लिए संबंधित विभागों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए।
बड़ी कंपनियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में बढ़ेंगे अप्रेंटिसशिप के अवसर
पीएम-एनएपीएस योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित बड़ी कंपनियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और अन्य पात्र संस्थानों में युवाओं के लिए अधिक से अधिक अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी जानकारी ली कि वर्तमान में जनपद में अप्रेंटिसशिप के लिए कितनी कंपनियां पंजीकृत हैं, इनमें कितने अप्रेंटिस कार्यरत हैं और नए प्रतिष्ठानों को योजना से जोड़ने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि युवाओं को केवल आईटीआई में प्रशिक्षण देने से काम पूरा नहीं होगा। उन्हें वास्तविक कार्यस्थल पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलना चाहिए। इससे युवाओं को उद्योगों की कार्यप्रणाली समझने के साथ-साथ प्रशिक्षण के बाद रोजगार हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
स्थानीय उद्योगों की होगी मैपिंग
जिलाधिकारी ने जिला सेवायोजन कार्यालय, जिला उद्योग केंद्र और सभी आईटीआई को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विभागों को अलग-अलग स्तर पर काम करने के बजाय एक साझा कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए, जिसमें उद्योगों की जरूरत, उपलब्ध रोजगार और युवाओं के कौशल को एक-दूसरे से जोड़ा जा सके।
जिला सेवायोजन अधिकारी और उद्योग विभाग को जनपद में संचालित स्थानीय उद्योगों की मैपिंग करने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इससे यह पता चल सकेगा कि अलग-अलग उद्योगों में किस प्रकार के कुशल मानव संसाधन की जरूरत है।
इसी के आधार पर आईटीआई में संबंधित ट्रेडों के प्रशिक्षण और हाई स्किलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
होटल-पर्यटन से लेकर ऑटोमोबाइल और विद्युत क्षेत्र तक रोजगार पर फोकस
जिलाधिकारी ने जनपद में रोजगार की संभावनाओं वाले विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन करने को कहा। इनमें होटल एवं पर्यटन, निर्माण, सेवा क्षेत्र, विद्युत, ऑटोमोबाइल और मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार और कुशल मानव संसाधन की मांग का अध्ययन कर उसी के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाए।
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डिस्ट्रिक्ट स्किल कमेटी करेगी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग
जिलाधिकारी ने डिस्ट्रिक्ट स्किल कमेटी के माध्यम से कौशल विकास और अप्रेंटिसशिप से जुड़ी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कमेटी की बैठकों में आईटीआईवार एनरोलमेंट, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, ट्रेडवार युवाओं की संख्या, उद्योगों के साथ समन्वय, पंजीकृत कंपनियों और अप्रेंटिसशिप की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।
उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को जनपद की प्रत्येक पात्र इंडस्ट्री और प्रतिष्ठान से समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण का अंतिम लक्ष्य युवाओं को रोजगार से जोड़ना
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि आईटीआई, सेवायोजन कार्यालय और उद्योग विभाग के बीच बेहतर समन्वय से ही कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि युवाओं को उनकी रुचि, योग्यता और संबंधित ट्रेड में रोजगार की मांग के अनुसार अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि कौशल प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ युवाओं को मिल सके।
बैठक में परियोजना निदेशक आनंद सिंह, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी विनय जोशी, जिला सेवायोजन अधिकारी अर्चना सजवान सहित विभिन्न आईटीआई के प्रधानाचार्य और संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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